नजरें तुम्हें देखना चाहे,
नजरें तुम्हें देखना चाहे,
इस में हमारी आँखों का किया कसूर,
हर पल यदें तुम्हारी आये,
इस मे हमारी सासों का किया कसूर,
वैसे तो सपने पूछ कर नही आते,
पर सपने तुमहारे ही रोज आये,
तो इस में हमारी नींदों का किया क़सूर,
Najre tumhe dekhna chahe,
Is me hamari akhon ka kiya kasur,
Har par yaad tumhari Aye,
Is me hamari Saason ka kiya kasur,
Wese sapne puch kar nahi Ate,
Par sapne tumhara roj Aye,
to is me hamari neendo ka kiya kasur,
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